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संत कबीर दास के दोहे अर्थ सहित

इस ब्लॉग में संत कबीर दास जी के प्रसिद्ध दोहे उनके सरल अर्थ और गहरे जीवन-दर्शन के साथ प्रस्तुत किए गए हैं। यहाँ आपको कबीर के दोहों के माध्यम से भक्ति, ज्ञान, प्रेम, सत्य और आत्मबोध का मार्गदर्शन मिलेगा। यह ब्लॉग उन सभी पाठकों के लिए है जो कबीर दास के विचारों को समझना और अपने जीवन में अपनाना चाहते हैं।

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मन के हारे हार है, मन के जीते जीत

 hindi dohe, kabir ke dohe
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। कहे कबीर हरि पाइए, मन ही के परतीत॥

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।
कहे कबीर हरि पाइए, मन ही के परतीत॥

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माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर

 hindi dohe, kabir ke dohe
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर। कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥

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जल में कुंभ, कुंभ में जल है, बाहर भीतर पानी

 hindi dohe, kabir ke dohe
जल में कुंभ, कुंभ में जल है, बाहर भीतर पानी। फूटा कुंभ जल जलहि समाना, यह तथ कहे ग्यानी॥

जल में कुंभ, कुंभ में जल है, बाहर भीतर पानी।
फूटा कुंभ जल जलहि समाना, यह तथ कहे ग्यानी॥

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साईं इतना दीजिए, जामे कुटुम समाय

 hindi dohe, kabir ke dohe
साईं इतना दीजिए, जामे कुटुम समाय। मैं भी भूखा ना रहूं, साधु न भूखा जाय॥

साईं इतना दीजिए, जामे कुटुम समाय।
मैं भी भूखा ना रहूं, साधु न भूखा जाय॥

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करता रहा सो क्यों किया, अब कर क्यों पछताय

 hindi dohe, kabir ke dohe
करता रहा सो क्यों किया, अब कर क्यों पछताय। बोए पेड़ बबूल का, आम कहाँ से खाय॥

करता रहा सो क्यों किया, अब कर क्यों पछताय।
बोए पेड़ बबूल का, आम कहाँ से खाय॥

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लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल

 hindi dohe, kabir ke dohe
लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल। लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल॥

लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल।
लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल॥

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अब तो जान लिया, राम नाम है सार

 hindi dohe, kabir ke dohe
अब तो जान लिया, राम नाम है सार। तन छीजे मन उजियारा, यह कबीर विचार॥

अब तो जान लिया, राम नाम है सार।
तन छीजे मन उजियारा, यह कबीर विचार॥

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ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोये

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोये। औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।।

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