Skip to content

संत कबीर दास के दोहे अर्थ सहित

इस ब्लॉग में संत कबीर दास जी के प्रसिद्ध दोहे उनके सरल अर्थ और गहरे जीवन-दर्शन के साथ प्रस्तुत किए गए हैं। यहाँ आपको कबीर के दोहों के माध्यम से भक्ति, ज्ञान, प्रेम, सत्य और आत्मबोध का मार्गदर्शन मिलेगा। यह ब्लॉग उन सभी पाठकों के लिए है जो कबीर दास के विचारों को समझना और अपने जीवन में अपनाना चाहते हैं।

  • Home
  • About us
  • परिचय
  • वैदिक घड़ी
  • Contact us

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत

 hindi dohe, kabir ke dohe
Man Ke Haare Haar Hai

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।
कहे कबीर हरि पाइए, मन ही के परतीत॥

Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर

 hindi dohe, kabir ke dohe
Mala Ferat Jug Bhaya

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥

Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

जल में कुंभ, कुंभ में जल है, बाहर भीतर पानी

 hindi dohe, kabir ke dohe
Jal Me Kumbh

जल में कुंभ, कुंभ में जल है, बाहर भीतर पानी।
फूटा कुंभ जल जलहि समाना, यह तथ कहे ग्यानी॥

Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

साईं इतना दीजिए, जामे कुटुम समाय

 hindi dohe, kabir ke dohe
Sai Itna Dijiye

साईं इतना दीजिए, जामे कुटुम समाय।
मैं भी भूखा ना रहूं, साधु न भूखा जाय॥

Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

करता रहा सो क्यों किया, अब कर क्यों पछताय

 hindi dohe, kabir ke dohe
Kabira Khada Bazaar Me

करता रहा सो क्यों किया, अब कर क्यों पछताय।
बोए पेड़ बबूल का, आम कहाँ से खाय॥

Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg
पुराने पोस्ट मुख्यपृष्ठ

Select Your Language

Follow us

Featured Post

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोये

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोये। औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।।

Whatsapp Channel

join our whatsapp channel

Popular Posts

  • काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
  • बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय
  • रात गंवाई सोय कर, दिवस गंवायो खाय
  • जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाहीं

Motivational Stories

Motivational Stories
Copyright © संत कबीर दास के दोहे अर्थ सहित | Powered by Blogger
Disclaimer | Privacy Policy | Terms & Conditions