दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय

दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय। जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय ॥

दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय ॥

भावार्थ: इस दोहे में संत कबीर दास जी ने मनुष्य की प्रवृत्ति और ईश्वर के प्रति उसकी भक्ति के स्वभाव को स्पष्ट किया है। कबीर कहते हैं कि जब मनुष्य के जीवन में दुःख, संकट, बीमारी या असफलता आती है, तब वह ईश्वर को याद करने लगता है और उससे अपनी परेशानियाँ दूर करने की प्रार्थना करता है। लेकिन जब जीवन में सुख, धन, सफलता और सुविधाएँ प्राप्त होती हैं, तब वह अक्सर ईश्वर को भूल जाता है और अपनी उपलब्धियों को अपनी योग्यता का परिणाम मानने लगता है। कबीर जी इस व्यवहार को उचित नहीं मानते, क्योंकि सच्ची भक्ति केवल संकट के समय भगवान को याद करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। मनुष्य को सुख और दुःख, दोनों परिस्थितियों में परमात्मा का स्मरण करना चाहिए तथा उसके प्रति कृतज्ञता बनाए रखनी चाहिए।

दोहा की दूसरी पंक्ति में कबीर जी समझाते हैं कि यदि मनुष्य सुख के समय भी ईश्वर का स्मरण करे, सद्कर्मों का पालन करे और अपने जीवन में सत्य, प्रेम, करुणा तथा संतोष को स्थान दे, तो वह अनेक प्रकार के मानसिक दुःखों से बच सकता है। यहाँ इसका अर्थ यह नहीं है कि ईश्वर का स्मरण करने वाले व्यक्ति के जीवन में कभी कोई कठिनाई आएगी ही नहीं, बल्कि नियमित भक्ति और आत्मचिंतन मनुष्य को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति, धैर्य और मानसिक शांति प्रदान करते हैं। जब व्यक्ति सुख में अहंकार नहीं करता और दुःख में अपना विश्वास नहीं खोता, तब उसका मन संतुलित रहता है। इस दोहे की मुख्य शिक्षा यह है कि ईश्वर का स्मरण केवल दुःख दूर करने का साधन नहीं, बल्कि जीवन में कृतज्ञता, विनम्रता और आंतरिक शांति बनाए रखने का मार्ग है।

Keywords: Hindi Dohe, Kabir Amritwani in Hindi Words, Kabir Ke Dohe With Their Meanings in Hindi Language, Sant Kabir Ke Dohe in Hindi, Search Kabir Ke Dohe Google Hindi, संत कबीर दास, कबीर के दोहे मीठी वाणी, Kabir Das in Hindi, Kabir Das Ke Dohe in Hindi, Kabir Ke Dohe in Hindi pdf, Dohe in Hindi with Meaning, Kabir Dohe on Life, Dukh Me Sumiran Sab Kare Sukh Me Kare Na Koi