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लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल।
लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल॥
अब तो जान लिया, राम नाम है सार।
तन छीजे मन उजियारा, यह कबीर विचार॥
कबीरा खड़ा बजार में, लिए लुकाठी हाथ।
जो घर फूंके आपना, चले हमारे साथ॥
करता रहे सो होत है, करता नहीं कुछ आप।
कर का करवा कर लिया, कहे कबीर चित चाप॥
माटी कहे कुमार से, तू क्या रोंदे मोहे।
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदुंगी तोहे ॥