Skip to content
कबीरा खड़ा बजार में, लिए लुकाठी हाथ।
जो घर फूंके आपना, चले हमारे साथ॥
करता रहे सो होत है, करता नहीं कुछ आप।
कर का करवा कर लिया, कहे कबीर चित चाप॥
माटी कहे कुमार से, तू क्या रोंदे मोहे।
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदुंगी तोहे ॥
दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय ॥
चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोये।
दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोए ॥
बड़ा भया तो क्या भया, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर ॥
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥